इबादत बाद में पहले मगर रोटी ज़रूरी है
न हो पूरी तो आधे चाँद सी आधी ज़रूरी है
न हो पूरी तो आधे चाँद सी आधी ज़रूरी है
उजालों पर तेरी तक़रीर से कुछ भी नहीं होगा
दिए में तेल से भीगी हुई बाती ज़रूरी है
शराफ़त का बहुत नुकसां उठाया है यहाँ मैं ने
मैं बच्चों को ये समझाता हूँ चालाकी ज़रूरी है
मसीहा की मसीहाई का चर्चा किस तरह होगा
ज़रूरी है यहाँ बीमार , बीमारी ज़रूरी है
ज़रूरत से हैं सब रिश्ते , न हो तो कौन पूछेगा
अगर बारिश न हो सोचो तो क्या छतरी ज़रूरी है ?
अगर बारिश न हो सोचो तो क्या छतरी ज़रूरी है ?
ज़रा सा रोज़ मरने का भी मैं अभ्यास करता हूँ
कि मरना तय है तो मरने की तैयारी ज़रूरी है
वो सूरज तो नहीं उग आए अपने आप जो हर रोज़
वो हाकिम है उजालों के लिए अर्ज़ी ज़रूरी है
"ख़याल" अब मेहरबां है वो ज़ुबाँ मीठी कई दिन से
बुलंदी पर पहुंचना है अभी सीढ़ी ज़रूरी है