करतब ने भरमाई आँख
सच को देख न पाई आँख
आवारा तितली जैसी
चेहरों पर मंडराई आँख
दूर उफ़ुक़ तक दौड़ी फिर
ख़ाली लौट के आई आँख
मंज़र , पस-मंज़र देखे
शाइर की दानाई आँख
देख सियासत-दानों की
हँसती है बलवाई आँख
याद आया कुछ बैठे-बैठे
भर आई सौदाई आँख
तकते–तकते राह “ख़याल”
दर पर भी उग आई आँख
Monday, 6 January 2025
करतब ने भरमाई आँख
Subscribe to:
Posts (Atom)
करतब ने भरमाई आँख
करतब ने भरमाई आँख सच को देख न पाई आँख आवारा तितली जैसी चेहरों पर मंडराई आँख दूर उफ़ुक़ तक दौड़ी फिर ख़ाली लौट के आई आँख मंज़र , पस-मंज़...
-
ਤਪਦੀ ਰਾਹ ਤੇ ਕੱਲ੍ਹੇ ਚੱਲੇ , ਬੈਠ ਗਏ ਯਾਦ ਤੇਰੀ ਦੇ ਰੁੱਖੜੇ ਥੱਲੇ , ਬੈਠ ਗਏ ਕੀ -ਕੀ ਆਇਆ ਯਾਦ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਕੀ ਦੱਸਾਂ ਤੇਰੇ ਸ਼ਹਿਰ ਚ ਜਾਕੇ ਕੱਲੇ ਬੈਠ ਗਏ ਮੁੜਕ...
-
इस जमीं में है , आसमान में हैं गर ख़ुदा है तो किस जहान में है मुश्किलों में है तेरे बंदे, ख़ुदा उनकी मुश्किल तुम्हारे ध्यान में है ? बड़बड़ात...
-
मोहब्बत पुल बनाती है तो नफ़रत तोड़ देती है कि हर सदभाव का धागा सियासत तोड़ देती है कोई मज़बूत कितना भी हो ग़ुर्बत तोड़ देती है ग़रीबों ...