ग़ज़ल
इम्काँ तो अच्छे देखे हैं
कुछ बच्चे हँसते देखे हैं
फूलों के सपने देखे हैं
सबने लब हंसते देखे हैं
सहरा से लड़ते देखे हैं
क़लमों पर पहरे देखे हैं
आंखों से गिरते देखे हैं
फूलों से महके देखे हैं
किसने दिन अच्छे देखे हैं
सब तेरे जैसे देखे हैं
पिंजरों में बैठे देखे हैं
मेहनत के तमगे देखे हैं
ख़ुद रहबर भटके देखे हैं
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