Wednesday, 4 January 2023

ग़ज़ल -29- मनका मनका बिखरा हूँ- उड़ान *

 

ग़ज़ल

 

मनका मनका बिखरा हूँ

थोड़ा –थोड़ा सबका हूँ

 

सांसों का ईंधन  हैं जो

याद वही पल करता हूँ

 

साथ चलूँ मैं भी सबके

कोशिश पूरी करता हूँ

 

बंद पड़ा है सालों से

मैं इक खाली कमरा हूँ

 

जिनकी फ़ितरत डसना है

उन लोगों में रहता हूँ

 

 

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