Thursday, 5 January 2023

ग़ज़ल -41- भूख -ग़रीबी से बेकारी से , डर जाते हैं कितने लोग- उड़ान *



भूख -ग़रीबी से बेकारी से डर जाते हैं कितने लोग
ज़िंदा रहने की कोशिश मेंमर जाते हैं कितने लोग
 
रोज़ी -रोटी की चिंता में , घर आँगन से ऊब गये
मयखानों से पूछोशाम कोघर जाते हैं कितने लोग
 
धीमे –धीमे ,कतरा –कतरा ,तिल –तिल मरते देखे हैं
मुर्दा बस्ती में जीने की कोशिश में मर जाते हैं कितने लोग
 

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