ग़ज़ल
हुए दफन हम भी इसी आस पर
की फिर जी उठेंगे किसी एक दिन
वहीं जा बसेंगे किसी एक दिन
हमीं जल बुझेंगे किस्सी एक दिन
बहुत अनकहा है जो दिल में अभी
सुनो , तो कहेंगे किसी एक दिन
यही सोच कर दिल को बहला लिया
कहीं तो मिलंगे किसी एक दिन
ग़ज़ल
हुए दफन हम भी इसी आस पर
की फिर जी उठेंगे किसी एक दिन
वहीं जा बसेंगे किसी एक दिन
हमीं जल बुझेंगे किस्सी एक दिन
बहुत अनकहा है जो दिल में अभी
सुनो , तो कहेंगे किसी एक दिन
यही सोच कर दिल को बहला लिया
कहीं तो मिलंगे किसी एक दिन
करतब ने भरमाई आँख सच को देख न पाई आँख आवारा तितली जैसी चेहरों पर मंडराई आँख दूर उफ़ुक़ तक दौड़ी फिर ख़ाली लौट के आई आँख मंज़र , पस-मंज़...
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