Thursday, 5 January 2023

ग़ज़ल -44- हाँ, दुःख तो है-उड़ान *

 
हाँ ,  दुःख तो है
अब है ,  सो है
 
दूर.. कहीं पर
सुख ,  तो है
 
सोचो मत तुम
देखो ,  जो है
 
दुख का क्या है
सोचो ,  तो है
 
ढूँढो,  रब्ब को
या मानो ,  है
 
क्यों फिर डरना
मरना ,  तो है
 
 

No comments:

Post a Comment

करतब ने भरमाई आँख

करतब ने भरमाई आँख सच को देख न पाई आँख   आवारा तितली जैसी चेहरों पर मंडराई आँख   दूर उफ़ुक़ तक दौड़ी   फिर ख़ाली लौट के आई आँख   मंज़र ,  पस-मंज़...