ख़ुश्क आंखों में ख़्वाब है फिर से
ख़त में लिपटा गुलाब है फिर से
और नज़र में सराब है फिर से
शाम है और शराब है फिर से
कौन ख़ाना-ख़राब है फिर से
फूटने को हबाब है फिर
से
यानि मुझको को जवाब है फिर से
हाथ में वो किताब है फिर से
आंख पर क्यों पुर –आब है फिर से
Thursday, 16 February 2023
ग़ज़ल -58-ख़ुश्क आंखों में ख़्वाब है फिर से-उड़ान *
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