सुकूँ की छाँव बिपताओं के आगे हैअभी तो धूप ही पाँव के आगे हैअभी काग़ज़ पे उतरेंगे कई नग़्मेअभी तस्वीर रेखाओं के आगे हैख़ुशी है ज़ेहन में छोटा सा इक कोनाजो आशाओं निराशाओं के आगे हैहै दीवानों का दुनिया से अजब रिश्ताकि इक बारात बेवाओं के आगे है“ख़याल” इस बात को तुम ज़ेहन में रखनाझुलसती धूप भी छाँव के आगे है
Friday, 24 March 2023
ग़ज़ल -66-सुकूँ की छाँव बिपताओं के आगे है -दस्तक
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करतब ने भरमाई आँख
करतब ने भरमाई आँख सच को देख न पाई आँख आवारा तितली जैसी चेहरों पर मंडराई आँख दूर उफ़ुक़ तक दौड़ी फिर ख़ाली लौट के आई आँख मंज़र , पस-मंज़...
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सुकूँ की छाँव बिपताओं के आगे है अभी तो धूप ही पाँव के आगे है अभी तुम पाने –खोने में ही उलझे हो ख़ुदा का घर तमन्नाओं के आगे है अभ...
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ग़ज़ल इम्काँ तो अच्छे देखे हैं कुछ बच्चे हँसते देखे हैं पलकों से अंगार उठाकर फूलों के सपने देखे हैं पीर न मेरे मन की देखी सबने लब हंसत...
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ग़ज़ल हमसे मिलने कैसे भी करके बहाने आ गया यार अपना हाले-दिल सुनने –सुनाने आ गया कोंपलें फूंटी भार आने को थी कि फिर से वो ज़र्द मौसम लेक...
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