सुकूँ की छाँव बिपताओं के आगे हैअभी तो धूप ही पाँव के आगे हैअभी काग़ज़ पे उतरेंगे कई नग़्मेअभी तस्वीर रेखाओं के आगे हैख़ुशी है ज़ेहन में छोटा सा इक कोनाजो आशाओं निराशाओं के आगे हैहै दीवानों का दुनिया से अजब रिश्ताकि इक बारात बेवाओं के आगे है“ख़याल” इस बात को तुम ज़ेहन में रखनाझुलसती धूप भी छाँव के आगे है
Friday, 24 March 2023
ग़ज़ल -66-सुकूँ की छाँव बिपताओं के आगे है -दस्तक
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करतब ने भरमाई आँख
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