नाख़ुदाओं से डर गया फिर मैं
और भँवर में उतर गया फिर मैं
दिल से
निकला तो आंख तक आया
बनके
आंसू बिखर गया फिर मैं
मन उड़ा
ले गई कोई चिंता
जिस्म लेकर ही घर
गया फिर मैं
मैं तो छलका था अपनी
आंखों से
तेरी आंखों में भर
गया फिर मैं
ख़ुद को खोजा यहाँ –वहां
मैनें
मन जिधर था उधर गया
फिर मैं
जी न पाया तो मर गया
फिर मैं
लोग ख़ुश
थे उधर गया फिर मैं
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