Thursday, 8 June 2023

ग़ज़ल-83 -अब यहाँ आके कोई क्या बैठे-उड़ान*

 

अब वहां जाके कोई क्या बैठे
उसकी महफ़िल में सब ख़ुदा बैठे
 
कुछ लगावट न थी मरासिम में
इसलिए हम  जुदा - जुदा बैठे
 
हम हैंदुःख हैं , ये ना-उमीदी है
हम ये कैसी जगह पे आ बैठे
 
बाग़ में सैर करने आये थे
पेड़-पौधों से दिल लगा बैठे
 
जिस जगह से सफ़र किया था शुरू
फिर उसी मोड़ पर हैं आ बैठे
 
उसने रस्मन कहा था कैसे हो
हम तो दुख -सुख उसे सुना बैठे
 
अब फ़क़ीरी में डर नहीं है ख़याल
पास जो कुछ था वो लुटा बैठे
  

No comments:

Post a Comment

करतब ने भरमाई आँख

करतब ने भरमाई आँख सच को देख न पाई आँख   आवारा तितली जैसी चेहरों पर मंडराई आँख   दूर उफ़ुक़ तक दौड़ी   फिर ख़ाली लौट के आई आँख   मंज़र ,  पस-मंज़...