Thursday, 29 June 2023

ग़ज़ल-85 -दर्द है ज़िंदगी , है दवा जिंदगी-उड़ान *

 
दर्द है ज़िंदगी  ,  है दवा जिंदगी
ज़िंदगी का है ख़ुद   आसरा ज़िंदगी
 
ख़त्म हो के भी ये ख़त्म होता नहीं
ख़्वाहिशों का कोई सिलसिला जिंदगी
 
हर तरफ़ दुख में डूबे हुए लोग हैं
किस तरफ है ख़ुशी कुछ बता ज़िंदगी

 आदमी , आदमी से ही डरने लगा
ज़िंदगी से ही क्यों है ख़फ़ा  ज़िंदगी जिंदगी

 हर गली मोड़ पर है कहानी नई
रंग कितने हैं तेरे बता ज़िंदगी

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