Friday, 4 August 2023

ग़ज़ल -89 -अपने देस, चलो अब योगी-उड़ान *

  अपने देस,  चलो रे योगी

बदलो भेस , चलो रे योगी

 

लादो तांगा , बांधों गठरी

है आदेस , चलो रे योगी

 

हाथ कमंडल ,काँधे कम्बल

बांधो केस , चलो रे योगी

 

 संगी साथी सब बेगाने

 तज परदेस,  चलो रे योगी

 

इस वैरागी मन पर फिर से

लागी ठेस , चलो रे योगी

 

आग विरह की धधक रही है

 पी के देस , चलो रे योगी  

 

 

 

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