Wednesday, 11 October 2023

हुक्म चलता है तेरा तेरी ही सरदारी है- 93-उड़ान*

 हुक्म चलता है तेरा , तेरी ही सरदारी है
तू  है पैसा, तू ख़ुदा ,  तेरी वफ़ादारी है

नंगापन भी तो बिका फ़न की तरह दुनिया में 
अब तो  जिस्मों की नुमाईश  ही अदाकारी है

कट गया  दिन तो  मेरा भीड़  में  जैसे-तैसे
लेकिन  अब  चाँद  बिना  रात बहुत  भारी है

ग़ौर   से  देख  ज़रा   बीज से अंकुर फूटा 
बस करिश्मा  सा ख़ुदा  का  ये ख़ल्क़ सारी है 

कट के गिर जाना है बस  पेड़ की तरह इक दिन 
रात -दिन काट रही वक़्त की ये आरी है 


 छोड़ दो  ,  ज़िद न करो  हार चुके हो अब तुम 
अब  कोई  दांव  न  खेलो तो  समझदारी  है

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