Monday, 16 October 2023

मेरी आंखों में ख़्वाब है फिर से-उड़ान *

 

ग़ज़ल सतपाल ख़याल
मेरी आंखों में ख़्वाब है फिर से
ख़त में लिपटा गुलाब है फिर से
 
फिर उदासी है बेसबब सी कोई
शाम है और शराब है फिर से
 
तुमने फाड़ी हैं अर्ज़ियाँ मेरी
यानि मुझको को जवाब है फिर से

तेरे लिक्खे हुए थे ख़त जिसमें 
हाथ में वो किताब है फिर से
 

 

 

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