Thursday, 5 September 2024

दुखी मन है ग़ज़ल कोई कही जाए-दस्तक

 
दुखी मन है ग़ज़ल कोई कही जाए
किसी अपने से दिल की बात की जाए
 
ये नाज़ुक तार साँसों के तो टूटेंगे
सदा-ए-साज़ जब तक है सुनी जाए
 
खड़ी है बाल खोले दर पे तन्हाई
ये विरहन या ख़ुदा दर से चली जाए
 
खरी-खोटी, भली-चंगी जो दिल में है
कहीं दिल में न रह जाए कही जाए
 
“ख़याल” आते हैं दश्त-ए-दिल में यूँ तेरे
किसी वीराने से जैसे नदी जाए

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