तुझ पे क़लम-कार ऐतबार नहीं है
झूटे हैं अख़बार ए'तिबार नहीं है
डूब गए हम भँवर में तुझ को
बचाते
हम पे भी सरकार ऐतबार नहीं है
लब पे सजा
के रखी है सब ने बनावट
सब हैं अदाकार ऐतबार नहीं है
कौन यहां बेच दे ज़मीर किसी
को
ये तो है बाज़ार ऐतबार नहीं है
तेरा ख़ुदा हूँ यक़ीन कर के कभी
देख
फेंक दे पतवार ऐतबार नहीं है
कौन सुनेगा यहां
"ख़याल" तेरी बात
सज गए इजलास ऐतबार नहीं है
Thursday, 5 September 2024
तुझ पे क़लम-कार ऐतबार नहीं है- दस्तक
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