ग़ज़ल
खुदा इस दुआ में असर एक दिन हो
उसे हाले –दिल की खबर एक दिन हो
इधर ही रही है उदासी हमेशा
ये रौनक कभी तो उधर एक दिन हो
अंधेरे में भटके हुए कारवाँ की
किसी
रौशनी को खबर एक दिन हो
दिखे तुमको हर शैय में चारा ख़ुदा का
नज़र में तेरी वो नज़र एक दिन हो
ये ख्वाहिश हमारी खुदारा हो पूरी
गली में तेरी मेरा घर एक दिन हो
पिऊँ ओक से मस्त होकर मैं नाचूं
वो साकी बने ऐसा ग़र एक दिन हो
ख़याल आज तेरा हुआ एक शायर
तुझे काश इसकी खबर एक दिन हो
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