Wednesday, 4 January 2023

ग़ज़ल -31-खुदा इस दुआ में असर एक दिन हो- उड़ान *

 

ग़ज़ल

 

खुदा इस दुआ में असर एक दिन हो

उसे हाले –दिल की खबर एक दिन हो

 

इधर ही रही है उदासी हमेशा

ये रौनक कभी तो उधर एक दिन हो

 

अंधेरे में भटके हुए कारवाँ की

किसी  रौशनी को खबर एक दिन हो


दिखे तुमको हर शैय में चारा ख़ुदा का

नज़र में तेरी वो नज़र एक दिन हो

 

ये ख्वाहिश हमारी खुदारा हो पूरी

गली में तेरी मेरा घर एक दिन हो


पिऊँ ओक से मस्त होकर मैं नाचूं

वो साकी बने ऐसा ग़र एक दिन हो

 

ख़याल आज तेरा हुआ एक शायर

तुझे काश इसकी खबर एक दिन हो

No comments:

Post a Comment

करतब ने भरमाई आँख

करतब ने भरमाई आँख सच को देख न पाई आँख   आवारा तितली जैसी चेहरों पर मंडराई आँख   दूर उफ़ुक़ तक दौड़ी   फिर ख़ाली लौट के आई आँख   मंज़र ,  पस-मंज़...