Wednesday, 4 January 2023

ग़ज़ल -32- दुखी मन है ग़ज़ल कोई कही जाए-उड़ान *

 

ग़ज़ल

 

दुखी मन है ग़ज़ल कोई कही जाए

किसी अपने से दिल की बात की जाय

 

ये नाज़ुक तार साँसों के तो टूटेंगे

सड़ा-ए-साज़ जब तक है सुनी जाए

 

ख़याल आते हैं दश्ते दिल में यूं तेरे

किसी वीराने से जैसे नदी जाय

 

खड़ी है बाल खोले दर पे तन्हाई

ये विरहन या खुदा दर से चली जाय

 

खरी खोटी भली चंगी जो दिल में है

कहीं दिल में न रह जाए कही जाय

 

 

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