ग़ज़ल
दिल में ग़म हैं ,लब हसते हैं
अंगारों पर फूल खिले हैं
सपने शबनम के कतरे हैं
सच की धुप में उड़ जाते हैं
और घरों में सन्नाटे हैं
इक टहनी पे फूल खिला है
एक से कुछ पत्ते टूटे हैं
गुजरी लम्बी रुत पतझर की
अब नन्हें अंकुर फूटे हैं
आंखों से आंसू टपके हैं
ग़ज़ल
दिल में ग़म हैं ,लब हसते हैं
अंगारों पर फूल खिले हैं
सपने शबनम के कतरे हैं
सच की धुप में उड़ जाते हैं
और घरों में सन्नाटे हैं
इक टहनी पे फूल खिला है
एक से कुछ पत्ते टूटे हैं
गुजरी लम्बी रुत पतझर की
अब नन्हें अंकुर फूटे हैं
आंखों से आंसू टपके हैं
करतब ने भरमाई आँख सच को देख न पाई आँख आवारा तितली जैसी चेहरों पर मंडराई आँख दूर उफ़ुक़ तक दौड़ी फिर ख़ाली लौट के आई आँख मंज़र , पस-मंज़...
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