देखते-देखते गया मौसम
सोचिये अब भला-बुरा मौसम
एक छ्ल्ला मिला है पीतल का
मुझको अलमारी में मिला मौसम
एक दिन मिल गया वो मिट्टी में
सख़्त हालात से लड़ा मौसम
मेरे जैसे उदास सा ही दिखा
बाद मुद्धत के जो मिला मौसम
धूप और छांव ज़िंदगी है "ख़याल"
ज़र्द होगा कभी हरा मौसम॥
No comments:
Post a Comment