धागे को चटखाना
उसके हित में था
रिश्ता
तोड़ के जाना उसके हित में था
उसकी मंशा
थी ही नहीं सुलझाने की
उलझा ताना–बाना
उसके हित में था
आग बुझाना
जिसकी ज़िम्मेदारी थी
बस्ती का
जल जाना उसके हित में था
डरता था वो नारों और
मशालों से
और लवें बुझ जाना उसके हित में था
जिसने सूरज बेचा
ठेकेदारों को
जुगनू का
मर जाना उसके हित में था
चारागर की नीयत ही कुछ ऐसी थी
ज़ख्मों का छिल जाना उसके हित में था
जाल बिछा कर उसने दाने फेंके थे
चिड़िया का ललचाना उसके हित में था
Thursday, 2 February 2023
ग़ज़ल -52 -धागे को चटखाना उसके हित में था-उड़ान*
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