किसी के दिल में जगह न पाई , न कोई तिनकों का आशियां है
अब ऐसी हालत में क्या बताऊँ , न साएबाँ है, न पासवां है
नज़र से हद्दे–ए-नज़र तलक बस धुआं -धुआं है , धुआं – धुआं है
तू लाख भूले वो दिन पुराने , मुझे तो है याद वो ज़माना
वो सोलवें साल की मुहब्बत , जो अब भी दिल में जवां-जवां है
है तेरी यादों का एक झरना , जो दश्ते-दिल का है आसरा सा
तेरी मुहब्बत का मेरे दिल में बचा हुआ बस यही निशां है
ये कैसी जादूगरी है दुनिया , इलाही इसकी है इंतिहा क्या
“ख़याल” हमने उस आसमां के भी पार पाया इक आसमां है
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