Monday, 3 April 2023

ग़ज़ल-69-शिकायत है मुझे इस बेबसी से-उड़ान *

 

ग़ज़ल

 

शिकायत है मुझे इस बेबसी से

मेरा झगड़ा नहीं है ज़िंदगी से

 

अंधेरों ने तो सहलाया है मुझको

मिले हैं जख्म मुझको रौशनी से

 

 मेरी मुश्किल नहीं आसान हुई ,पर

मुझे हिम्मत मिली है बंदगी से

 

 

ये मेरे दुश्मनों के दोस्त भी हैं

डरा हूँ दोस्तों की मुख़बिरी से

 

ये शाइर है या आशिक़ या शराबी

ये पेश आता है कितनी सादगी से

 

सियासत ने चली है चाल फिर-फिर

लड़ाया आदमी को आदमी से

 

कटी है उम्र इक लाला की मिल में

चला है दाल –फुल्का नौकरी से


निभाते हैं सभी किरदार अपना

“ख़याल” अब क्या गिला करना किसी से

 

 

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