जो लेकर लौ चले थे वो कहां हैं
जो कल सच कह रहे थे वो कहां हैं
दियों के काफ़िले थे वो कहां हैं ?
उजालों की हिफ़ाज़त करने वालो
दिए जो जल रहे थे वो कहां हैं
वो किन झीलों पे बरसे हैं बताओ
जो कल बादल उड़े थे वो कहां हैं
हमारी प्यास ने पत्थर निचोड़े
कुएँ जो नक़्शे पे थे वो कहां हैं
ए पानी बेचने वालो बताओ
जो राहों में घड़े थे वो कहां हैं
लहू के लाल धब्बे सबने देखे
जो पत्थर बांटते थे वो कहाँ हैं
कबूतर जो उड़े थे वो कहां हैं
“ख़याल” अब खाइयां है नफ़रतों की
कि पुल जो जोड़ते थे वो कहां है
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