तेरे बिन कटी, मेरी ज़िंदगी, मेरे दिल में बस ये मलाल है
मुझे चाहता है तू अब भी क्या ? मेरे लब पे बस ये सवाल है
तू जुदा भी है , तू मिला भी है, तू है ख़ुद ज़मीं, तू ही आसमां
न रक़ीब है , न हबीब है, न है दिल में ग़म, न है आँख नम
ये है दौर क्या ? ये दयार क्या ? जहाँ हिज्र है, न विसाल है
मेरे साहिबा , मेरे साजना , तू मिले तो क्या , न मिले तो क्या
तेरे जुस्तजू में ही ख़ुश हूँ मैं , तेरी आरज़ू ही कमाल है
किसी को किसी की हो क्यों ख़बर, है जुदा –जुदा सभी का सफ़र
कि है फ़िक्र सबकी जुदा-जुदा, यहाँ सबको अपना "ख़याल" है
No comments:
Post a Comment