ज़िन्दगी जैसे बने , वैसे बिताकर चल पड़ो
बोझ है तो बोझ को सर पर उठाकर चल पड़ो
अश्क़ गुदड़ी में छुपाकर रख लो गौहर की तरह
फेक सी मुस्कान को लब पर सजाकर चल पड़ो
दर्द की आदत ही पड़ जाए तो फिर तुम यूं करो
पैर में काँटा कोई फिर से चुभाकर चल पड़ो
जिनको ढोते ढोते कितने लोग मिट्टी हो गए
तुम भी उन सारी सलीबों को उठाकर चल पड़ो
ख़ाक़ हो जायेंगे सारे चोर हों या साध हों
क्या भला है, क्या बुरा ,सब कुछ भुलाकर चल पड़ो
अपने होने की भी कोई तो निशानी दो 'ख़याल'
चंद अपने शेर यारों को सुनाकर चल पड़ो
Monday, 16 October 2023
ज़िन्दगी जैसे बने , वैसे बिताकर चल पड़ो- उड़ान *
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
करतब ने भरमाई आँख
करतब ने भरमाई आँख सच को देख न पाई आँख आवारा तितली जैसी चेहरों पर मंडराई आँख दूर उफ़ुक़ तक दौड़ी फिर ख़ाली लौट के आई आँख मंज़र , पस-मंज़...
-
ਤਪਦੀ ਰਾਹ ਤੇ ਕੱਲ੍ਹੇ ਚੱਲੇ , ਬੈਠ ਗਏ ਯਾਦ ਤੇਰੀ ਦੇ ਰੁੱਖੜੇ ਥੱਲੇ , ਬੈਠ ਗਏ ਕੀ -ਕੀ ਆਇਆ ਯਾਦ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਕੀ ਦੱਸਾਂ ਤੇਰੇ ਸ਼ਹਿਰ ਚ ਜਾਕੇ ਕੱਲੇ ਬੈਠ ਗਏ ਮੁੜਕ...
-
इस जमीं में है , आसमान में हैं गर ख़ुदा है तो किस जहान में है मुश्किलों में है तेरे बंदे, ख़ुदा उनकी मुश्किल तुम्हारे ध्यान में है ? बड़बड़ात...
-
मोहब्बत पुल बनाती है तो नफ़रत तोड़ देती है कि हर सदभाव का धागा सियासत तोड़ देती है कोई मज़बूत कितना भी हो ग़ुर्बत तोड़ देती है ग़रीबों ...
No comments:
Post a Comment