कभी दो बूँद गले से
उतार कर देखो
कभी खुमार में दो पल
गुज़ार कर देखो
मैं उसके दिल में
हूँ तो अश्क बनके टपकूंगा
कि मेरे नाम से उसको
पुकार कर देखो
मजा नहीं है फ़कत
जीतने में हर बाज़ी
मजा तो हार में भी
है जो हार कर देखो
कहीं मिले तो कहो
तुम हूर जन्नत की
यूं आईने में उसे
तुम उतार करा देखो
“ख़याल” क्या है
जुदाई , विसाल क्या शैय है
कि दिल में हिज़्र का
खंजर उतार कर देखो
Monday, 16 October 2023
कभी दो बूँद गले से उतार कर देखो- उड़ान *
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