Thursday, 19 September 2024

बदल कर रुख़ हवा उस छोर से आये तो अच्छा है

 

बदल कर रुख़   हवा  उस छोर से आये  तो अच्छा है

मेरी कश्ती भी साहिल तक  पहुँच जाये  तो अच्छा है

 

मसाइल  और भी  मौजूद हैं  इस के सिवा  लेकिन

मोहब्बत  का भी  थोड़ा ज़िक्र  हो जाये तो  अच्छा है

 

दिलों में  उल्फ़तें हों , ज़ेहन  में  चालाकियां कम  हों

कोई  चंद  ऐसे  लोगों  से  जो  मिलवाये  तो अच्छा है

 

गली  तेरी , मकां  तेरा , पता  तेरा , पता  किस को

कि तेरे शह्र का ही कोई मिल जाये  तो अच्छा है

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अदालत भी  उसी की  है , वकालत भी “ख़याल” उस की

वो  पेचीदा दलीलों  में न  उलझाये  तो अच्छा है

 

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