Friday, 20 September 2024

बन के आँसू बिखर गया पानी-दस्तक

 
बन के आँसू बिखर गया पानी
चढ़ते-चढ़ते उतर गया पानी

पानियों को भी काट दे ये कटार
इस सियासत से डर गया पानी
 
देख , सहमी हुई सी मछली को
कैसे पांनी से डर गया पानी

जल रहे घर की बात आई तो
फिर मदद को  मुकर गया पानी

दूब की नोक पे हो  शबनम ज्यूं
त्यूँ  पलक पर ठहर गया पानी

आँख तेरी ज़रा सी नम जो हुई
मेरी आँखों में भर गया पानी

जब से बिछड़ा "ख़याल" बादल से  
देख फिर दर-ब-दर गया पानी
 
 
 

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